मन को वश में करने का 2 आसान उपाय | Best Motivational Story in Hindi

दोस्तों मान लो की आप एक स्टूडेंट हो और आपको अच्छे से पता है अधिक टीवी देखना, मोबाइल पर चैट करना इत्यादि आपके study को नुकसान देता है फिर भी आप हर रोज टीवी देखते है, मोबाइल चलाते है। आपका वजन जरूरत से अधिक है फिर भी आप वो खाना हर रोज खाते है जिससे आपका वजन लगातार बढ़ता ही जाता है। तो सच मानिए दोस्तों आपका मन आपके वश में नही है। आप अपना लक्ष्य तभी हासिल कर सकते हो जब आपका मन आपके वश में हो।

अगर आप अपने मन के वश में है तो अपने लक्ष्य को भूल ही जाइये। कई लोग कहते है - मेरा जो दिल करता है मैं वहीं करता हूँ, जो की गलत है। आप वो कीजिये जो आपको करना चाहिए। आप वो मत किजिये जो आपका मन करता है। पर इस मन को वश में करना भी बहुत कठिन है। श्रीमदभागवत गीता में श्रीकृष्ण ने स्वयं ही मन को वश में करने के 2 अचूक उपाय बताए है। आज इस आर्टिकल में हमलोग यही 2 अचूक उपायों को विस्तार से पढ़ेंगे-

दोस्तों हमारा मन एक बे-लगाम घोड़े की तरह है। इस पर आपको हम एक कहानी बताते है-
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Best Motivational Story in Hindi


एकबार एक ठग बाबा था। ये बाबा बड़ी-बड़ी बातें फेंकता था। इस बाबा ने एक अच्छा धंधा चलाया हुआ था। ये बाबा बड़ी-बड़ी बातें करके लोगो को तेल बेचा करता था। जितने लोगो के सिर में बाल नहीं होते वे लोग इस बाबा के बातों में आ जाता था। ये बाबा तेल बेचते समय एक ही बात कहा करता था कि इस तेल को एक बार लगाने से ही बाल आ जायेगा और ये बाल तुम्हारे सिर में ऊपरी शक्तियाँ भी लेकर आएगी। लेकिन ध्यान एक बात का रहे की जब इस तेल को लगाओ तो लगाते समय तुम्हारे मन में भगवान की याद नहीं आनी चाहिए। अगर इस तेल को लगाते समय तुम्हारे मन में भगवान का याद आ जाता है तो तुम्हे ये तेल फिर से आकर लेना पड़ेगा।

यकीन मानिए अगर कोई नास्तिक व्यक्ति भी इस तेल को लेकर जाता तो उसे परमात्मा की याद आ ही जाती। हर रोज इस झूठे बाबा से लोग तेल खरीदते। असल में, हमारा मन या दिमाग इसी तरह काम करता है। आप अपने मन को समझाइये की ये मत करना तो आपका ध्यान वही चला जायेगा। मान लो जैसे ही आपने अपने मन को संदेश देते हो की कल से मीठा नहीं खाना है क्योंकि हम मोटे हो रहे है तो फिर क्या आपके मन में हमेशा मीठा ही घूमता रहेगा।

श्रीमदभागवत गीता के अध्याय 6 के 34 श्लोक में अर्जुन पूछते है कि हे कृष्ण ये मन चंचल है, बलवान है और हठी भी बहुत है। इस मन को वश में करना वायु को वश में करने से भी मुश्किल है। अगले श्लोक 35 में भगवान श्री कृष्ण ने मन को वश में करने के 2 उपाय बताते है। आइये हमलोग पहले उपाय को एक कहानी के माध्यम से समझने की कोशिश करते है-

एक छोटे से गाँव में एक नाई था। पुरे गाँव में वो केवल एक अकेला ही नाई था इसलिए उसकी दुकान खूब चलता था। उसके दो पुत्र थे। उसका बड़ा बेटा 12 सालों से उसके दुकान में लोगो के बाल काटने में उसकी मदद कर रहा था। छोटे पुत्र को अभी एक महीना ही हुआ था कि वह अपने पिता की दुकान पर जाना शुरू किया। कुछ दिनों के बाद उस नाई की मृत्यु हो जाती है। बड़े पुत्र को दुकान चलाने का अनुभव हो गया था मगर वह अपने पिता की मृत्यु के बाद गलत सांगत में पड़ गया और वह नशे करना भी शुरू कर दिया। वह अपने छोटे भाई से रोज झगड़ा भी किया करता था। एक दिन उसने छोटे भाई को बहुत बुरा भला कहा। जिससे दोनों भाई में झगड़ा हो गया। फिर सभी गाँव वालों ने मिलकर पंचायत बुलवाई, जिसमें फैसला यह लिया गया कि दुकान के दो हिस्से कर दिया जाए और दोनों लड़के एक एक दुकान को संभालेंगे। दोनों भाई ने पंचायत के इस फैसले को मान लिया।

बड़े भाई को बाल काटने का अनुभव था इसलिए उसकी दुकान खूब चलती थी। लेकिन छोटे भाई को अनुभव नहीं था इसलिए जब उसके पास कोई बाल कटवाने जाता तो जैसे का तैसा बाल काट देता था। जिससे छोटे भाई का दुकान न के बराबर चलता था। बड़े भाई का दुकान तो खूब चल रहा था इसलिए उसके पास ढेर सारी पैसे आ गए। अब उसने उस पैसों को नशे में उड़ाना लगा। पहले वह केवल रात में नशा करता था, मगर अब वह दिन और रात दोनों समय नशा करने लगा। जब बड़ा भाई दिन में नशा करने लगा तो उसकी दुकान लगभग बंद रहने लगी, जिससे मजबूरन लोग छोटे भाई के पास बाल कटवाने के लिए जाने लगा। छोटे भाई को अनुभव नहीं था इसलिए उसने शुरू में बाल ठीक से नहीं काट पाता था। धीरे-धीरे जैसे ही इसे अनुभव हुआ इसकी दुकान खूब चलने लगी। लोगो का बाल काट-काटकर उसका अभ्यास हो गया। अब छोटे भाई भी बाल काटना सिख लिया था। मगर नशे के निरंतर अभ्यास ने बड़े भाई को बर्बाद कर दिया।

श्रीकृष्ण ने भी मन पर कंट्रोल करने के लिए अभ्यास को एक रास्ता बताया है। जिसका सीधा सा अर्थ है- आपको बार-बार अभ्यास करना होगा। पहली बार आप सफल नहीं हो पाएंगे। निरंतर अभ्यास ही आपको सफलता दिलाएगी। दूसरा तरीका है- वैराग्य। 

वैराग्य मन की वो अवस्था है जिसमे मन में किसी के प्रति राग-भाव नहीं होता। वैराग्य का मतलब ये नहीं है कि आप जंगलों में चले जाये। इसका अर्थ है आप चीजो के प्रति लगाव न रखे। इसको भी एक उदाहरण के द्वारा समझते है-

मान लीजिए आप एक स्टूडेंट है और आपको हर रोज एक टीवी सीरियल देखने की आदत है। ये टीवी सीरियल हर रोज रात को 8:30 बजे आती है। आप अपने इस लत से बहुत परेशान है और आप टीवी देखना बंद करना चाहते है तो इसके लिए आपको टीवी देखने से दूर रहना होगा। आप उस समय पर सैर करने के लिए जा सकते है, प्रार्थना कर सकते है या कुछ और भी कर सकते है। जिस समय वह टीवी सीरियल आती है उस समय आप सैर करने के लिए निकल जाये। ऐसा प्रतिदिन करने से आप उस टीवी सीरियल के प्रति वैराग्य उत्पन्न कर लेंगे। उस टीवी सीरियल पर आपकी पकड़ कम हो जायेगी। दोस्तों, वैराग्य तभी संभव है जब इस चीज का ज्ञान हो जाए की लालसा और कामना का कोई अंत नहीं है अथवा इसमें डूबने का कोई फायदा नहीं है। ऐसा ही सोच रखकर आप किसी चीज से या बुरी आदत से दूर हो सकते है।

मैं आशा करता हूँ की आपको हमारा यह आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा। ऐसे ही आर्टिकल को पढ़ने के लिए आप हमारे वेबसाइट www.101gyani.com पर विजिट कर सकते है। धन्यवाद ।

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