क्या आपको गुस्सा आता है - गुस्से पर कंट्रोल कैसे करे

एक गुस्सा करने वाले व्यक्ति की कहानी 


गुस्सा तो हर व्यक्ति को आता है चाहे वह व्यक्ति लड़का हो या लड़की या फिर बच्चा, जवान या बूढ़ा सभी को गुस्सा आता है। गुस्सा आखिर कार क्यों आता है ? जब आपकी कोई काम नहीं होती है तब आपको बहुत अधिक ही गुस्सा आता है। आज के इस आर्टिकल में हम आप सभी को एक ऐसी कहानी बताएँगे जिसमें दो व्यक्ति आपस में बात करते-करते गुस्से में आकर क्या-क्या बोल देता है जिससे वह व्यक्ति बाद में बहुत पछताता है। आपलोग बस ध्यान से इस गुस्से वाली पूरी कहानी को जरूर पढ़े- 
gussa ko kaise roke, gussa kya hai, gussa kab aata hai, gusse me kya n kare
क्रोध या गुस्सा आपका दुश्मन होता है


एक बार एक व्यक्ति अपने रिश्तेदार से बहुत वर्षो के बाद मिलता है। दोनों साथ बैठकर बहुत सारी बातें करता है और अपने सुख-दुख को आपस में बताता है। इतने वर्षों में जो घटनाएँ उनके साथ घटती है उन सभी के बारे में बाते करते है। इन्ही सब बातों को करते-करते आपस में एक छोटा सा झगड़ा हो जाता है। झगड़ा काफी छोटा था, मगर उस व्यक्ति को गुस्सा बहुत जल्दी आता था। उस व्यक्ति ने अपने गुस्से में उस छोटे से झगड़े को बहुत बड़ा बना दिया। उस व्यक्ति ने गुस्से में बहुत सी ऐसी बाते कह दी जो रिश्तेदार को बहुत बुरी लगी। फिर क्या था दोनों वहां से उठकर चले जाते है। 

रिश्तेदार बहुत दूर के एक गाँव या शहर से आया था। इसलिए वह अपने घर चला गया। लेकिन उस व्यक्ति का घर तो वही था इसलिए वह अपने घर चला गया। अब कुछ दिनों के बाद उस व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास होता है, उसने सोचा मैंने गुस्से में आकर रिश्तेदार को बहुत सी ऐसी बाते कह दी है जो कहना आवश्यक नहीं था। अब इस गलती का प्रायश्चित कैसे करूँ। 

वह व्यक्ति अपने गलती का प्रायश्चित करने के लिए एक संत के पास जाता है, क्योंकि रिश्तेदार अपने गाँव जा चूका था। अब उसके गाँव जाना और अपने काम-काज छोड़ना उसे अच्छा नहीं लग रहा था। इसलिए वह व्यक्ति संत बाबा से जाकर अपनी सारी बाते बताता है और कहता है मुझे अपनी गलती का प्रायश्चित करना है। मैं कैसे करूँ ? मैंने जो बातें उस रिश्तेदार से कही है उसका प्रायश्चित कैसे करूँ। 

संत कहते है - एक काम करों, मैं तुम्हे ये कुछ छोटे-छोटे पंख दे रहा हूँ। ये सारे पंख इकठ्ठा करके बिच बाजार में छोड़कर आ जाओ। फिर क्या था उस व्यक्ति ने सोचा यह तो बहुत आसान है। उसने पंख को इकठ्ठा किया और बिच बाजार में छोड़कर आ गया। वापस आकर उस व्यक्ति ने संत से कहा- मैंने सारी पंख को इकठ्ठा करके बिच बाजार में छोड़ दी है, अब क्या करूँ। 

अब संत कहते है- अब तुम्हें वही सारी पंख इकठ्ठा करके वापस लेकर आना है। जब तक की वह व्यक्ति बाजार पहुँचता है तब तक सभी पंख उड़कर जहाँ तहाँ बिखर जाता है जिसे इकठ्ठा करना नामुमकिन होता है। यानि सभी पंख उड़ जाते है। अब वह व्यक्ति फिर से वापस संत के पास आकर कहता है- बाबा वो पंख तो वहाँ बचा ही नहीं है। उसे वापस इकठ्ठा करके लाना मुमकिन नहीं है। 

संत ने कहा- उसी प्रकार जब आप क्रोध में ऐसी बाते कह देते है जो कहना आवश्यक नहीं होता है। उसे वापस नहीं लिया जा सकता है। 

हम कई बार गुस्से में अपनी भावनाओं में इतने बह जाते है कि सामने वाले व्यक्ति के भावनाओ को समझते ही नही है। इसलिए कुछ भी कहने से पहले सौ बार सोच लेना चाहिए की जो आप कहने जा रहे है, क्या उसे वापस लिया जा सकता है। अगर नहीं तो क्या वे शब्द इतने अच्छे है कि सामने वाले व्यक्ति को सुनकर बुरा न लग सके। 

इसलिए हमेशा याद रखे कुछ भी कहने से पहले सौ बार सोचे। अपने कभी किसी बड़े बुजुर्ग लोगो से या फिर किताबों में कही पढ़ा होगा- गोली और बोली एक सामान होती है। गोली अगर बन्दुक से निकल जाये तो उसे वापस लाया नहीं जा सकता उसी जो बोली एकबार मुँह से निकल जाये वह कभी वापस नहीं लौट सकता है।

इस कहानी को लिखने का मेरा मकसद बस ये था कि आप इस कहानी को पढ़कर गुस्से पर कंट्रोल कर सके। क्योंकि गुस्सा कोई बुखार तो है नही की इसे दवा के द्वारा ठीक किया जा सके। 

आपको गुस्सा कब-कब आता है ? हमें नीचे कमेंट कर जरूर बताये। धन्यवाद ।

1 Comments

  1. Mujhe gussa har pal har USS inshan par aata Jo sirf apne mtlb ke lachar majbur logo ka fayda uthte h aur sabse jyada apne dost gharwale aadi sabhi me kya kru apne mann ki shanti ko kese wapas lau apne jivan me please help me mein bhut preshan hu

    ReplyDelete