कोरोना वायरस से संबंधित फेक न्यूज फैलाने पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

दुनिया भर की सभी तमाम देश कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। भारत भी इस वायरस से अछूता नहीं है। भारत सरकार ने अपने देशवासियों को कोरोना संक्रमण से बचाने और संक्रमित लोगों के इलाज के लिए युद्ध स्तर पर अपनी कोशिश जारी किये हुए है। इसी बीच सरकार के बीच एक बड़ी चुनौती आ गई है और वो है फेक यानि फर्जी न्यूज को लेकर। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि वो इस संकट की घड़ी में मिडिया की संचालन से जुड़ी दिशा निर्देश जारी करे ताकि इस वक्त समाज में बड़े पैमाने पर घबराहट पैदा न हो।

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◆ कोरोना वायरस के इस संकट के दौरान केंद्र सरकार को ये अंदेशा था कि किसी भी फेक या फर्जी न्यूज से समाज में   भारी भगदड़ मच सकती है। इसलिए बीते 31 मार्च को केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से गुजारिश की कि covid-19 से जुड़ी कोई भी जानकारी छापने या दिखाने से पहले मिडिया सरकार को उसकी पुष्टि कराये। 

◆ सरकार के इस आग्रह पर अदालत ने मीडिया को कुछ दिशा निर्देश जारी किए लेकिन साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वो स्वतंत्र चर्चा के अधिकार में कोई दखलंदाजी नहीं करेगी। 

किस जगह पर कितनी देर तक जिंदा रह सकता है कोरोना वायरस


◆ अदालत ने सरकार को आगामी 24 घंटों में मीडिया को सभी माध्यमों से कोरोना वायरस के बारे में हो रही घटनाओं और तथ्यों पर एक दैनिक बुलेटिन शुरू करने का आदेश दिया। यह फैसला भारत के मुख्य न्यायधीश शरद अरविन्द बोबड़े की अगुवाई में किया गया। 

◆ इस बारे में गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक मिडिया खास कर वेब पोर्टल द्वारा प्रकाशित और प्रसारित किसी भी गलत जानकारी से आम आदमी के बीच भगदड़ मच सकती है। मौजूदा संकट के हालात में इस तरह के किसी भी रिपोर्टिंग से पूरे देश को काफी नुकसान पहुँच सकता है। गौरतलब है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत इस प्रकार आतंक फैलाना एक प्रकार का अपराध माना गया है। 

◆ अदालत ने अपने फैसले से पत्रकारिता की आजादी और ऐसी स्थिति के दौरान समाज में घबराहट से बचने की जरूरत, दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। 

वैसे तो फेक न्यूज की परिभाषा काफी व्यापक है इसकी कई शाखाएँ हो सकती है लेकिन आम शब्दो में बताए तो फेक न्यूज में छोटे लीग्स या समाचार या जानकारियाँ शामिल होती है। फेक न्यूज फैलाने का मकसद पाठकों को गुमराह करना होता है। 

फेक न्यूज प्रसारित करने की काम को Yellow Journalism कहा जाता है। शोशल मिडिया पर कोरोना वायरस को लेकर कई प्रकार की अफवाहें चल रही है जिसके चलते आम आदमी के मन में घबराहट पैदा हो रही है। 

आप सभी पाठकों / मित्रों से निवेदन है कि आप किसी भी प्रकार का फेक न्यूज अपने शोशल मिडिया यानि whatsapp, facebook आदि से न फैलाये। फेक न्यूज फैलाना एक प्रकार का अपराध है। 

कोरोना वायरस से संबंधित फेक न्यूज को पढ़ें


भारत सरकार के निर्देशानुसार, कोरोना वायरस से बचने का एकमात्र रास्ता है शोशल डिस्टेंसिंग। आप अपने घरों में रहे सुरक्षित रहे। कोरोना वायरस से बचने के लिए आप अपने हाथों को लगातार साबुन और पानी से धोते रहे।

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