LockDown और कर्फ्यू क्या है ? यह किस कानून के तहत और कब लगाया जाता है

LockDown क्या होता है और यह किस कानून के तहत देश या राज्य में लागू किया जाता है ? LockDown के लागू होने से क्या-क्या प्रभाव पड़ता है यानि कौन-कौन सी चीजें बंद हो जाती है और कौन-कौन सी चीजें खुली रहती है ? साथ ही, इस आर्टिकल में हमलोग कर्फ्यू और लोकडौन के बीच के अंतर को भी समझेंगे। बहुत से लोग कर्फ्यू और LockDown को एक ही चीज समझ रहे है, इसलिए हम आपको पहले कर्फ्यू के बारे में बताते है-

दंड प्रक्रिया संहिता ( CRPC ) की धारा 144 के तहत कर्फ्यू को लगाया जाता है। इस धारा को लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट एक नोटिफिकेशन ( सुचना ) जारी करता है। जिस जगह पर यह धारा लगाई जाती है वहाँ पर चार या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते है। अगर कोई धारा 144 का विरोध करता है या इसको तोड़ता है तो उसके प्रति Indian Penal Code ( भारतीय दंड संहिता ) सेक्शन 188 के तहत केश दर्ज किया जाता है। जिसमें उसे चार महीने की जेल या जुर्माना या फिर दोनों सजाएँ हो सकती है।

कर्फ्यू ( Curfew ) का प्रारंभ सबसे पहले इंग्लैंड में द विलियम कांकरर द्वारा राजनीतिक दमन के लिए किया गया था। यह धारणा16वीं शताब्दी से ही चली आ रही है।

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LockDown क्या है और यह किस कानून के तहत लागु किया जाता है : 

लॉकडाउन को महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत लागु किया जाता है। ये अधिनियम पुरे देश में लागू होता है। इस अधिनियम का इस्तेमाल किसी भी विक्राल या भयंकर समस्या के दौरान होता है। जब केंद्र या राज्य सरकार को यह विश्वास हो जाता है कि कोई संकट या बीमारी देश या राज्य में आ चुकी है और सभी नागरिकों तक पहुँच रही है तब केंद्र और राज्य सरकार दोनों इस अधिनियम को लागू कर सकता है। इस अधिनियम में केवल 4 धाराएँ है जिसमें सरकार को संपूर्ण अधिकार दिया गया है। इस अधिनियम की धारा-2 राज्य सरकार को कुछ शक्तियाँ प्रदान करती है। इसके तहत केंद्र और राज्य सरकारें बीमारी या महामारी के रोकथाम के लिए Temperory Rules बना सकती है। 

सरकार ऐसे सभी नियम बना सकती है जो बीमारी या महामारी के रोकथाम के लिए कारगर साबित हो सके। इस अधिनियम के Section-2 के Sub Section- 2 के मुताबिक, राज्य की सरकार उनलोगों का निरीक्षण कर सकती है जो लोग किसी भी तरह की यात्रा करके आ रहे हो। इसके लिए सरकार किसी भी प्रकार का प्रोसेस का इस्तेमाल कर सकती है। इसी अधिनियम के धारा-3 के अनुसार, नियमों को तोड़ने वालों पर धरा 188 के तहत केश दर्ज किया जा सकता है। जिसमें 4 महीने की जेल या जुर्माना या फिर दोनों सजाएँ हो सकती है।

LockDown के दौरान क्या खुला और क्या बंद रहता है : 

लॉक डाउन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लोगो से अपील किया जाता है कि आप घरों में रहे। इसमें जरूरी सेवाओं के अलावा सभी सेवाएँ बंद कर दी जाती है। जैसे की दफ्तर ( Office ), दुकानें, फैक्ट्रियाँ और परिवहन की सुविधा। सार्वजनिक स्थान जैसे की मॉल, हॉल, जिम, स्पोर्ट्स क्लब, कोचिंग संस्थान इत्यादि सभी बंद कर दी जाती है। लॉकडाउन
लागु होने के बाद किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन की इजाजत नहीं होती है। 

लोकडौन के दौरान अगर किसी का मृत्यु हो जाता है तो उसके दाह संस्कार करने के लिए 20 से अधिक लोगो की जाने का अनुमति नहीं होता है। लॉक डाउन में जरूरी सेवाओं को छूट दी जाती है और इससे जुड़े परिवहन आ और जा सकते है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आम राशन की दुकानों के साथ-साथ सब्जी की दुकानें खुली रहती है। 

सामान्य भाषा में समझे : 

➡️ LockDown का मतलब है तालाबंदी। 

➡️ लॉक डाउन एक आपातकालीन व्यवस्था है जो किसी भी प्रकार के आपदा या महामारी फैलने के दौरान लागू किया
      जाता है। 

➡️ जिस इलाके में लॉकडाउन लगता है उस इलाके के लोगो को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है। 

➡️ जहाँ भी लॉकडाउन लागू होता है वहाँ के लोगों को केवल दवा और खाने-पीने जैसी जरूरत चीजों की खरीदारी के 
      लिए बाहर जाने की अनुमति होती है। 

➡️ Lock Down के दौरान बैंक से पैसे निकालने का अनुमति होता है। 

➡️ जिस प्रकार से किसी फैक्ट्री या संस्थान को बंद किया जाता है उसी प्रकार से आप अनावश्यक चीजों के लिए सड़क 
      पर न निकलें। 

➡️ अगर आपको लॉकडाउन की वजह से किसी प्रकार का परेशानी होता है तब आप संबंधित पुलिस थाने, पुलिस 
      अधीक्षक, या फिर अन्य किसी उच्च अधिकारी को फोन कर सकते है। 

➡️ LockDown जनता की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है।

ध्यान दे : भारतीय दंड संहिता के धारा 269 और 270 के अधीन संक्रमण को फैलाना एक दंडनीय अपराध है। अगर किसी व्यक्ति पर ये धारा लागू होती है तब उसे 2 साल तक की कारावास हो सकती है। 

मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आप लॉकडाउन के दौरान अपने घरों में ही रहे। आप इस दौरान अपने घर में सुरक्षित रह सकते है।
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