साइकोलॉजी के अनुसार, मौत आने से पहले क्या होता है, इससे बचने की प्रक्रिया क्या है ? - Psychology Facts

दोस्तों, यह आर्टिकल साइकोलॉजी फैक्ट्स का है ! इस आर्टिकल में जानेंगें की साइकोलॉजी के अनुसार, मौत आने से पहले क्या होता है और इससे बचने की प्रक्रिया क्या है ? साइकोलॉजी हमारे दिमाग और आदत का विज्ञान है ! इसमें सचेत और अचेतन घटना के अध्ययन के साथ-साथ भावना और विचार शामिल है ! साइकोलॉजी ( Psychology ) का अर्थ है - मनोविज्ञान ! ब्राउन के अनुसार इसकी परिभाषा है - शिक्षा के द्वारा मानव व्यव्हार में परिवर्तन किया जाता है तथा मानव व्यव्हार का अध्ययन ही मनोविज्ञान कहलाता है ! साइकोलॉजी अनुभव का विज्ञान है, इसका उद्देश्य चेतनावस्था की प्रक्रिया के तत्वों का विशलेषण, उनके परस्पर संबंधों का स्वरुप तथा उन्हें निर्धारित करने वाले नियमों का पता लगाना है ! मनोविज्ञान, मानव अन्तर्निहित वेदनाओं का संग्रह है ! 
 
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Psychology Facts for Before Death 

  • मृत्यु कैसा भी हो काल या अकाल, उसकी प्रक्रिया 6 महीने पूर्व से ही शुरू हो जाती है यानि 6 महीने पहले ही मृत्यु को टाला जा सकता है ! पुराणी साइकोलॉजी के अनुसार, मौत का पता 9 महीने पहले ही चलने लगता है लेकिन हम यहाँ 6 महीने की बात करेंगे ! पहले कुछ चरण में हम समझेंगे की मौत आने से पहले इंसान को कैसा महसूस होता है ! 
  •  पुराणों में बताया गया है की मृत्य की आहट सबसे पहले मस्तिष्क में नहीं बल्कि नाभि में होती है ! पहले नाभि का चक्र टूटता है ! इस चक्र का नाम मणिपुर चक्र होता है जो की ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से 7 चक्रों में से एक चक्र होता है ! यह एक दिन में नहीं टूटता है, इसके टूटने में बहुत लंबा प्रोसेस होता है ! जैसे-जैसे यह टूटता जाता है वैसे-वैसे मृत्यु करीब आती जाती है और हमें कुछ लक्षण महसूस होने लगते है !
  •  स्वशास्त्र के हिसाब से, सपने कई बार भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देते है ! जैसे की अशुभ सपना या फिर शुभ सपना ! मृत्यु के निकट आने पर इंसान को अशुभ सपने ज्यादा आते है ! मृत्यु के निकट आने पर इंसान को अपने आसपास कुछ सायों के मौजूदगी का अहसास होने लगता है ! शास्त्रों के हिसाब से यह उस व्यक्ति के पूर्वज होते है जो मृत अवस्था में उनके पास आते है ! 
  •  मृत्यु के निकट आने वाले इंसान को 6 महीने पहले से ही किसी बड़ी विपत्ति का आभास होने लगता है ! वह बहुत डरा हुआ होता है ! उसे अकेले में रहना पसंद होता है ! वह ज्यादा लोगो से घुलता-मिलता नहीं है, बल्कि लड़ाई-झगडा करने लगता है क्योंकि उसका दिमागी संतुलन सही नहीं होता है ! इस बात का साक्षी गरुड़ पुराण है ! 
  • मृत्यु के नजदीक पहुँचते-पहुँचते इंसान की आँखों के सामने अँधेरा छाने लगता है ! उसे चाँद में भी दरार नजर आने लगता है लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है ! उसे अपनी परछाई भी खुद से अलग होती हुई दिखाई पड़ने लगती है ! कई बार तो ऐसा सुना गया है की इंसान को परछाई का सिर ही नहीं दिखाई पड़ता है ! 
  • इतना ही नहीं इंसान को 5 से 6 महीने पहले से ही अपने पसीने की गंध में फर्क महसूस होने लगता है, ऐसा इसलिए होता है की उसका शरीर पहले के हिसाब से कमजोर होता जाता है और ऐसी स्थिति में इंसान के पसीने से अजीब गंध आने लगती है, जिसे मृत्यु गंध कहा जाता है ! कई बार दर्पण  में वह अपना चेहरा सही से नहीं देख पाता ! वह पानी, तेल और दर्पण में अपनी परछाई सही से नहीं देख पाता है या फिर धुंधली देख पाता है !
  • मृत्यु के निकट आने वाले इंसान का शरीर हल्का पीला व सफ़ेद होने लगता है ! शरीर पर हलकी सी लालिमा आ जाती है, आँखों के नीचे गहरा काला निशान आने लगता है ! वह इंसान कडवे और खट्टे में फर्क नहीं कर पाता है ! सामान्य तौर पर इंसान को मल और मूत्र दोनों एक साथ नहीं आते है लेकिन ऐसे इंसानों को मल और मूत्र एक साथ आने लगती है ! ऐसा होने पर समझ लेना चाहिए की उसकी जिंदगी 6 महीने से ऊपर नहीं है ! 
  • सामान्यतः जब हम हाथ अपने कान पर रखते है तो हमें हल्की सी आवाज सुनाई पड़ती है लेकिन मृत्यु के नजदीक इंसान को ऐसी कोई आवाज नहीं सुनाई देती है ! 3 या 4 महीने पहले से ही उसे अपने नाक की नोक को देखने में बहुत दिक्कत होती है, पैर फूलने लगते है ! घर के आसपास हर दिन कुत्ता रोने लगता है ! 1 सप्ताह पहले से ही बांया आँख फरफराने लगता है ! 

 मौत को टालने का उपाय  

मौत सत्य है, आज तक इससे कोई बचा नहीं है लेकिन इसे कुछ वक्त के लिए टाला जा सकता है ! यह कोई तंत्र-मंत्र नहीं है, सत्य है ! जैसे ही आपको मृत्यु का आभास हो जाए, आप सतर्क हो जाए, सारे बिछड़े काम पुरे करके घर वालों को असीलियत बता दें ! 

रोज सुबह 3:55 A.M. पर अँधेरे में अपने सामने एक मोमबत्ती जलाकर उसे एकटक 1 घंटे या फिर उससे ज्यादा तक रोज देखें ! कई बार आपके सामने कुछ अजीब घटनाएँ हो सकती है लेकिन बिना डरे आपको इसे करना है ! इस प्रक्रिया से लोग सालो साल तक अपनी मौत टाल चुके है ! पुराने ज़माने में यह प्रक्रिया संत-महात्मा भी किया करते थे ! 
 
ध्यान देने योग्य बातें : मैंने यह आर्टिकल केवल Education Purpose के लिए लिखा है ! ताकि आपको इसके बारें में कुछ ज्ञान मिल सके ! मै ये नहीं जनता की यह कितना सच है और कितना झूठ ! इन सभी का पता वेद और पुराण पढने पर ही चलेगा ! मेरा मकसद किसी को डराना या धमकाना नहीं है बल्कि ज्ञान को आपलोगों के पास पहुँचाना है ! अगर कुछ गलती हो जाए तो हमें क्षमा कर दें और किसी आर्टिकल को हटवाने के लिए हमसे contact पेज पर संपर्क करें !
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