असली ध्यान ( Meditation ) ऐसे किया जाता है | एक सच्ची कहानी - 101 Gyani

दोस्तों, ध्यान यानि मैडिटेशन सभी लोगों को करना चाहिए क्योंकि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है | ऐसे में आज हम आपको एक कहानी के माध्यम से बताएँगे की असली ध्यान यानि मैडिटेशन किस प्रकार से किया जाता है | 
दूसरों को समझना बुद्धिमानी है, खुद को समझना असली ज्ञान | दूसरों को काबू करना बल है और खुद को काबू करना वास्तविक शक्ति है | जिसने संसार को बदलने की कोशिश की वो हार गया और जिसने खुद को बदल लिया वो जीत गया !!

 

aise kiya jata hai asli meditation, meditation story hindi, truth meditation, asli meditation, sachcha meditation, meditation kaise kare, meditation karne ka niyam,

सच्चा ध्यान क्या है | असली ध्यान क्या है :

एक बार सुबह-सुबह के समय संत कबीर ने अपने बेटे कमाल से कहा की - बेटा, पास के जंगल से गाय और भैंसों के लिए थोड़ा चारा ले आ | यह सुनकर कमाल जंगल गया लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटा | अब संत कबीर और उनके शिष्यों को चिंता होने लगी की, कमाल अब तक क्यों नहीं लौटा ? जंगल में शाम के समय जानवर भी निकल आते है | 

कमाल को खोजने के लिए संत कबीर और उनके शिष्य निकल पड़े | बहुत खोजने के बाद कमाल, जंगल के पास एक खेत में खड़ा दिखाई दिया | संत कबीर उनके पास गए और उससे बोले - कमाल यहाँ इस तरह क्यों खड़े हो ? कमाल ने उनकी बात नहीं सुनी लेकिन 2-3 बार बोलने पर ऐसे चौंका जैसे एकदम से कमाल किसी दूसरी दुनिया से लौट आया हो | 

कमाल ने पूरी बात बताई - पिताजी क्षमा करें, मै सुबह जब यहाँ आया तो हवा में लहलहाती इस घास को देख कर मुझे अच्छा लगा और मैं भी कुछ देर यहाँ घास बन कर खड़ा हो गया, ये हवाएँ मुझे भी घास की तरह छू रही थी | मुझे बड़ा आनंद आ रहा था इसलिए मुझे समय का पता ही नहीं चला की कब सुबह से शाम हो गई | 

दोस्तों, एक सच्चा ध्यान वो है जिसमें आप किसी काम में इतना खो जाओ की आपको पता ही न चले की मैं उस काम से अलग हूँ | अगर आप पढ़ रहे हो तो किताब ही बन जाओ, अगर बोल रहे तो मुँह ही बन जाओ, अगर चल रहे हो तो पैर ही बन जाओ, यहीं सच्चा ध्यान है | 

यहीं है सच्चा आनंद जिसे एक योगी 24 घंटे महसूस करता है | काम करते हुए भी अपने अन्दर एक आंतरिक शांति महसूस करता है | जो भी करो उसमें डूब जाओ | 

याद रखना दोस्तों, ध्यान में तुम्हारी उर्जा जमा होती है और उसी उर्जा से फोकस और बुद्धिमता बढ़ती है | 
 
संत कबीर दास जी का एक दोहा है - धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतू आए फल होय | 
इस दोहे का संक्षेप में अर्थ है - मेहनत का फल समय आने पर ही मिलता है !! 
जिंदगी में कुछ खोना पड़े तो यह दो लाइन याद रखना- जो खोया है उसका गम नहीं लेकिन जो पाया है वह किसी से कम नहीं, जो नहीं है वह एक ख्बाब है और जो है वह लाजवाब है !!

Post a Comment

Previous Post Next Post